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Bharat par Arab Aakraman | भारत पर अरब आक्रमण

Bharat par Arab Aakraman | भारत पर अरब आक्रमण

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Bharat par Arab Aakraman | भारत पर अरब

भारत में अरबों का प्रथम आगमन मालाबार तट (केरल) में व्यापारियों के रूप में हुआ। अतः भारत में इस्लाम का प्रथम आगमन केरल में हुआ न कि सिंध में। अरब भारत पर पहले मुस्लिम आक्रमणकारी थे।

  • अरब आक्रमण के समय सिन्ध की राजधानी अलोर (वर्तमान रोहेरा) व राजा दाहिर था।
  • दाहिर के पिता का नाम चच था। चच ने सिन्ध के राय वंश के शासक राय साहसी द्वितीय की हत्या कर गद्दी हथिया ली।
  • चच ब्राह्मण था, जबकि राय वंश के शासक शूद्र थे।

अरब आक्रमण के स्रोत-

चचनामा सिन्ध पर अरब आक्रमण का सर्वाधिक प्रामाणिक स्त्रोत है। मूलतः यह पुस्तक मुहम्मद बिन कासिम के किसी अज्ञात सैनिक/ सेवक द्वारा अरबी में लिखी गई। बाद में चचनामा को मुहम्मद अली बिन अबु बक कुफी ने नासिरूद्दीन कुबाचा के समय फारसी में अनुदित किया।

  • चचनामा का फारसी से अंग्रेजी अनुवाद यू. एम. दाउदपोटा ने किया।
  • बिलादूरी की पुस्तक ‘किताब- फुतूल-अल-बलदान’ जो कि 9वीं शताब्दी की रचना है, में सिन्ध पर अरब आक्रमण की जानकारी मिलती है।
  • मीर मोहम्मद मासूम (अकबर के दरबार में) की तारीख-ए-सिंध से भी अरब आक्रमण की जानकारी मिलती है।
  • कलिला व दिम्ना पंचतन्त्र का अरबी अनुवाद है।

ब्रह्मसिद्धान्त (बह्मगुप्त द्वारा रचित) एवं खण्डनखण्डखाद्यक नामक संस्कृत पुस्तकों का अरबी में अनुवाद जल जाफरी एवं इब्राहिम पिंजरी ने किया खलीफा मंसूर के समय इन पुस्तकों को विद्वान आठवीं सदी में बगदाद ले गये।

अल हज्जाज ने कासिम से पहले 711 ई. में उबैदुला एवं वर्दूल के नेतृत्व में भी सिन्ध पर आक्रमण करने के लिए सेना भेजी थी, जिन्हें दाहिर ने पराजित किया था।

मुहम्मद बिन कासिम

मुहम्मद बिन कासिम को अल हज्जाज, जो कि इराक का गवर्नर था,ने सिन्ध पर आक्रमण हेतु भेजा। इस समय खलीफा वालिद था।

सिन्ध पर आक्रमण का तात्कालिक कारण यह था कि समुद्री डाकुओ ने श्रीलंका जा रहे जहाजों को लूट लिया।

  • यह घटना देवल (बन्दरगाह) में थट्टा के पास सिन्ध के समुद्री किनारे पर हुई।
  • दाहिर ने न तो डाकुओं को नियन्त्रित किया व न हर्जाना दिया।
  • सिन्ध की व्यापारिक महत्ता भी आक्रमण का महत्वपूर्ण कारण था।
  • कासिम मकरान तट वाले मार्ग से आक्रमण करने आया था।

कासिम ने सर्वप्रथम देवल (बन्दरगाह) के मन्दिर को मंजानिक (मेंगोनेल्स) तथा नौफथा (पत्थर फैकने का अस्त्र) से गिराया।

दाहिर

20 जून, 712 ई. के दिन मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व वाली अरब सेना ने दाहिर को परास्त कर रावरके युद्ध में मार डाला।

दाहिर की मृत्यु के बाद उसकी विधवा रानीबाई ने रावर के दुर्ग की रक्षा की कड़े प्रतिरोध के बाद रानी ने जौहर किया।

यह भारतीय इतिहास में वर्णित जौहर का पहला साक्ष्य है।

मोका नामक देशद्रोही ने कासिम की मदद की थी।

रावर के बाद कासिम ने ब्राह्मणवाद पर आक्रमण किया। यहाँ दाहिर के पुत्र जयसिंह ने मुकाबला किया और अन्ततः दाहिर की दूसरी रानी लाडी से उत्पन्न दो पुत्रियों सूर्या एवं परमल देवी कासिम के हाथ लगी एवं खलीफा वालिद के पास भेजी गई।

  • चचनामा के अनुसार दाहिर की पुत्रियों की शिकायत पर खलीफा वालिद ने कासिम को मृत्युदण्ड दे दिया।
  • सिंध आक्रमण के समय जाटों एवं बौद्धों ने कासिम की सहायता की थी।
  • भारत में सर्वप्रथम जजिया कर की वसूली भी मुहम्मद बिन कासिम ने सिन्ध में की।

सिन्ध के बाद कासिम ने 713 ई. में मुल्तान को जीता। मुल्तान की जीत में अरबों को इतना सोना मिला कि मुल्तान का नाम सोने का नगर रख दिया। मुल्तान कासिम की अन्तिम विजय थी।

मुहम्मद बिन कासिम ने अपनी बहुजातीय सेना में हिन्दुओं को भी नियुक्त किया।

अरब आक्रमण के प्रभाव:-

अरबों ने ऊंट पालन व खजूर की खेती का प्रचलन किया।अरबों ने दिरहम नामक सिक्के को सिन्ध में प्रचलित किया।अरबों ने भारतीय अंकों को अपनाया। अरबों ने सिन्धु नदी के तट पर ‘महफूजा’ नामक नगर भी स्थापित किया।

  • अमीर खुसरों के अनुसार अरब खगोल शास्त्री अबु मासर ने दस वर्ष तक बनारस में खगोल शास्त्र का अध्ययन किया
  • 731 ई. में अरबों ने सिन्धु नदी के तट पर मन्सूरा नगर स्थापित किया था।
  • हिन्दू शब्द का प्रथम बार प्रयोग अरबों ने किया था।
  • लेनपूल के अनुसार सिन्ध पर अरब आक्रमण भारतीय इतिहास में एक घटना व इस्लामी इतिहास में परिणाम विहिन जीत थी।
  • अतः सिन्ध विजय के राजनैतिक परिणाम अल्पकालीन रहे। सांस्कृतिक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण घटना थी।

वुल्जले हेग ने अरबों द्वारा सिन्ध विजय को भारतीय इतिहास की एक आकस्मिक कथा मात्र बताया है।

871 ई. तक सिन्ध में खलीफाओं की सत्ता प्रायः समाप्त हो गई तथा सिन्ध का मुल्तान व मसूरा नामक दो अरब राज्यों में विभाजन हो गया।

पैगम्बर मुहम्मद के बाद में इस्लाम के प्रथम चारखलीफा क्रमशः थे:

  1. अबु बक्र (मुहम्मद साहब चाचा)
  2. उमर
  3. उस्मान
  4. अली

कुरान में खलीफा शब्द प्रतिनिधि के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

यहां खलीफा को पृथ्वी पर खुदा का प्रतिनिधि माना जाता है।

मूनक नामक भारतीय चिकित्सक ने खलीफा हारून का इलाज किया था।

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